बीजेपी ने जारी किया संकल्प पत्र , 2014 से 2019 तक यहाँ है पूरा हिसाब

भारतीय जनता पार्टी ने जारी किया वादों का संकप्ल पत्र , लोकसभा चुनाव 2019 का पहला चरण 11 अप्रैल से शुरू हो रहा है इस वादों की सूचि में 2014 में किया गए वादे भी दोहराए गए है।
लोकसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं। 11 अप्रैल से देश की जनता सभी राजनेताओ का हिसाब करने के लिए मैदान में उतारेगी।
कैसे रहे पिछले 5 साल ? कितना हुआ विकास ? किसको मिली नौकरी ? किसानो का क्या है देश में हाल ? आखिर क्या है पिछले 5 सालो का निष्कर्ष ? कुछ ऐसे ही सवाल जरूर जनता के मन में होंगे।
एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने 2014 की ही तरह बड़े-बड़े वादे जनता के समक्ष रख दिए हैं। पर क्या आपने बीजेपी की तरफ से जारी 2014 का घोषणा पत्र भूल तो नहीं गये ? क्या आप उन सारे वादों का हिसाब नहीं माँगना चाहेगें ?
आईये नजर डालते है 2014 के कुछ वादो पर जो भारतीय जनता पार्टी ने देश की जनता से किये थे –
1 महगाई , रोजगार, स्वरोजगार, भ्रष्टाचार, काला धन
2 राम मंदिर के निर्माण का जिक्र.
3 हर गांव को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा.
4 शिक्षण संस्थाओं को विश्वस्तरीय बनाना होगा.
5 हर व्यक्ति के पास एक पक्का घर हो.
6 किसानों को लागत मूल्य से 50 फीसदी अधिक मिले.
7 मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार जरूरी. ब्रैंड इंडिया पर जोर.
8 हर राज्य में एम्स की स्थापना होगी.
9 हर गांव में पाइप से पानी पहुंचाने का वादा.
10 नैशनल ई-लाइब्रेरी का वादा
आईये जानते हैं पिछले 5 सालो में बेरोजगारी पर कुछ अकड़े –
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महिलाओं की असुरक्षा के मामले में भारत प्रथम स्थान पर है –
पिछले 3 सालो में कितने किसानों ने की आत्महत्या ?
भारतीय जनता पार्टी के द्वारा 2019 में फिर से दोहराए गये पुराने वादे
किसानों की आय दोगुनी करेंगे –
पिछली सरकार के द्वारा 2014 चुनावों में भी यही वादे के साथ किसानो का वोट बैंक अपनी तरफ खींच लिया था। पर 5 साल के भीतर ही पता चल गया कि यह सिर्फ और सिर्फ ढकोसले ही थे। 2018 मार्च में नासिक से महाराष्ट्र तक आये 30 हजार किसानो ने यह बात साफ़ कर दी थी की मौजूदा सरकार उनकी बिलकुल भी परवाह नहीं करती , और अगर हम किसानो के द्वारा आत्महत्या किये जाने पर बात करें तो उनके आंकड़े भी चौकाने वाले हैं। 2014 से 2016 तक करीब 36000 किसानो ने आत्महत्या कर ली है। 2016 के बाद किसानो की आत्महत्या से जुड़ा कोई भी आंकड़ा मौजूद नहीं हैं।
गंगा को स्वच्क्ष करेंगे –
भारत में नदियों को देवी का रूप मान जाता है , उनकी पूजा होती है। भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के घोसणा पत्र में गंगा की सफाई को ले कर वादा किया था। इस वादे से हिंदुत्व का वोट बैंक पर बीजेपी की पैनी नजर थी। लेकिन 5 साल बाद भी गंगा वैसे की वैसे ही नज़र आती है। सरकारी खजाने से गंगा की सफाई को ले कर अब तक 3475 करोड़ रूपये निकाले जा चुके हैं पर सवाल यह है कि अभी तक गंगा साफ़ क्यों नहीं हुई ? सरकारी खजाने से निकला गया पैसा आखिर गया कहां ?
रेल को और बेहतर बनायेगे –
भारतीय रेल (आईआर) एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क तथा एकल सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। बीजेपी के द्वारा इसे ले कर भी 2014 चुनावी रण में बहुत बड़े-बड़े वादे किये गये थे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2014 चुनावी सभा में यह कहा था कि ‘अगर हमारी सरकार बनी तो वे बुलेट ट्रैन भारत को सोपेंगे’ जापान से भारत ने बुलेट ट्रैन के लिए करोड़ो रूपये का क़र्ज़ लिया पर सवाल यह है कि क्या हमें अभी बुलेट ट्रैन की जरुरत है। साधारण ट्रेनों में यात्रियों की काफी भीड़ रहती है क्या यह आवशयक नहीं की उनमे बोगियों की संख्या बढ़ाई जाये ?
नए हवाई अड्डों का करेंगे निर्माण –
नये हवाई अड्डे की भारत में कई स्थानों पर आवश्यकता है , पर सरकारों का इस तरफ रुझान थोड़ा कम ही दिखाई देता है। सरकार के द्वारा श्रावस्ती में हवाई अड्डा बनाने की बात कही गयी थी जो की कागज़ो में काफ़ी हद तक बन चुके हैं पर वास्तविकता में वहां हवाई अड्डे के नाम पर 2-4 कमरों की एक बिल्डिंग है जो अब खंडहर में बदल चुकी है। श्रावस्ती एक अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल है जहाँ देश-विदेश से लोग बौद्ध धर्म से सम्बंधित स्थानों को देखने के लिये आते हैं। जिससे उनको काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
राम मंदिर बनायेंगे –
राम मंदिर एक ऐसा मुद्दा है जिसमे भारतीय जनता पार्टी को पुनः जीवित कर दिया। इस मुद्दे को राजनेता चुनाव के समय इस्तेमाल करते हैं जिससे हिदुत्व का उन्हें काफी समर्थन मिलता है। पर पिछले 5 सालो में भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर के लिए क्या किया ? अगर राम मंदिर का मसला सुप्रीम कोर्ट में ही हल होना था तो देश ने बीजेपी को वोट दे कर सत्ता में क्यों लागा गया ?
पिछले 5 सालो में किये गये काम की क्या है सच्चाई –
पेट्रोल , डीज़ल हुआ महंगा –
2014 से पहले कांग्रेस की सरकार में पेट्रोल डीज़ल के दाम काफी अधिक बढ़ गये थे। उस समय अंतरास्ट्रीय बाज़ार में भी पेट्रोल के दाम काफी अधिक थे , पर भारत में लगातार भारतीय जनता पार्टी और अन्य विरोधी पार्टी उच्चे दामों का विरोध कर रही थी। उसके कुछ समय बाद 2014 में चुनाव हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार बनायीं। सरकार बनने के बाद पेट्रोज डीज़ल के दाम कुछ दिनों तक कम रहे पर फिर से दाम बढ़ना शुरू हो गया। उन बढ़ते दामों पर रोक लगाने में बीजेपी असफल रही।
ग्रामीण उज्वला योजना-
ग्रामीण इलाको में मुफ्त में गैस कनेक्शन बाटे गये। ग्रामीण काफ़ी खुश हुए पर उनकी ख़ुशी ज्यादा दिन नहीं टिक पायी।स्लेंडर के दामों में बढ़ोतरी हुई और ग्रामीण उसका सिर्फ कुछ ही दिनों तक इस्तेमाल कर पाये। सरकार ने उन्हें यह सुविधा इस लिए मुहैया करवाई थी की वह चूल्हे में खाना न बनाये पर उन लोगों का क्या जो दुबारा से कभी भी सिडेंडर नहीं ले पाए ?
जीएसटी –
जीएसटी का व्यापारियों के जीवन में काफी अधिक प्रभाव पड़ा है बड़े व्यापारी को इस से ज्यादा असर देखने को नहीं मिला पर छोटे व्यापारी जैसे ठेले वाले , चोहराहे वाले दुकान दारों को काफी अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। कुछ छोटे व्यापारियों की दुकाने तक बंद हो गयी।
काला धन –
पिछले साल की हुई सभाओं और रैलियों में भारतीय जनता पार्टी द्वारा कई वादे किये गये पर जो सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला वादा था वो था काला धन को वापस लाना। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सरकार के आते ही 100 दिन में कला धन वापस लाने की बात कही थी , चुनावों के समय वह बताते थे की उनके पास काला धन रहने वालो की एक सूचि है पर आज 2019 लोकसभा चुनाव भी आ गये पर कला धन वापस नहीं आया।
नोटबंदी –
8 नवम्बर 2016 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोटों का चलन बंद का दिया था। उन्होंने ऐसा कदम उन लोगो के लिए उठाया गया था जिनके पास नगदी के रूप में काला धन जमा हैं पर आकड़ो की माने तो 99.30% रूपये बैंको में वापस आ गया था मात्र 0.70% रूपये बैंको में वापस ना आ सका। बीजेपी के द्वारा किया गया यह प्रयास भी विफल रहा। इसके आलावा नागरिको को बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। नोटों को बदलने और एटीएम से पैसे निकलने के लिए लाइन में खड़े करीब 100 लोग अपनी जान गवा बैठे थे।

