Economic Slowdown : आर्थिक मंदी से जूझते हुए, टाटा की कई फक्ट्रियों पर लटक रहा है ताला

Economic Slowdown: आर्थिक मंदी से हालत बहुत ही नाजुक है। शोरूम बंद होते जा रहे हैं, लोग बेरोजगार होते जा रहे हैं। सत्ता में आने के लिए भारतीय जनता पार्टी का 2 करोड़ नौकरियाँ देने का वादा सिर्फ वादा ही रह गया।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग की 700 से 800 फैक्ट्री बंद , 25000 से 30000 लोगों की नौकरियाँ ख़त्म, ऑटो सेक्टर इंडस्ट्रीस में 2 से 3 लाख लोग बेरोजगार, ऑटो सेक्टर में 217 शो रूम बंद।
देश इस समय अपने बुरे वक्त में है, आर्थिक समस्या इस कदर भारत को जकड़े हुए है कि अब इसकी अर्थव्यवस्था चरमराती हुई दिखाई दे रही है। जैसे कि ऊपर आंकड़ों में दिखाया गया है कि लोगों से बड़ी तादात में उनका रोजगार छीना जा रहा है जो कि एक गंभीर विषय है। इस बुरे दौर में सबसे अधिक परेशान हैं, ऑटो सेक्टर के लोग, अनुमान है कि ऑटो सेक्टर में 25 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।
कितना है ऑटोसेक्टर में गिरावट का प्रतिशत
ऑटोसेक्टर की संस्था सियान (सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स) ऑटोकंपनी संगठन का कहना है कि जून में 24 प्रतिशत गाड़िया कम बिकी हैं इससे पहले भी कई महीनों से इस तरह की गिरावट लगातार देखने को मिल रही है। चार पहिया वाहनों के साथ ही दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी काफ़ी असर पड़ा है। हालांकि माना जा रहा है कि अगर यह मंदी 3 महीने तक और रही व दिवाली के समय भी इसकी मांग न बढ़ी तो इस सेक्टर से जुड़े 10 लाख लोग अपनी नौकरी गंवा देंगे।
एनडीटीवी इंडिया की मानें तो वोल्वो बनाने वाले जॉन पीटर करीब 18 महीने में 8 लाख का काम करते थे। जबकि अब वह एक लाख का काम भी नहीं कर पा रहे हैं, उन्होंने अपनी फैक्ट्री से 13 मजदूरों को निकाल दिया है। बाकी बचे मजदूरों का वेतन भी कम कर दिया है। वहीं पर काम कर रहे एक कारीगर चंद्र बोस की सैलरी 18 हजार रुपये प्रतिमाह से घटकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है। आपको बता दें कि चेन्नई के कारखानों में गाडियों के ब्रेक से जुड़े पुर्जे बनाये जाते हैं जो कि अब बंद हो गए हैं। इसके साथ ही जो कारखाने अभी भी चल रहे हैं उसमें कर्मचारियों की छटनी लगातार जारी है।
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क्या सरकार इस मंदी को हिंदू–मुस्लिम और कश्मीर मुद्दे में भटकाना चाहती है ?
सवाल यह है कि 35 करोड़ कार बन कर तैयार हैं और बिकने का इंतजार कर रही हैं, कार नहीं बिक रही तो ऑटो डीलर बंद हो गये हैं, जिन डीलरों के पास कर्ज का बोझ है उनके लिए सरकार क्या कदम उठा रही है ? क्या उन्हें सिर्फ हिंदू मुसलमान और कश्मीर की धारा 370 के मुद्दों में उलझाया जा रहा है ?
टाटा की कई फैक्ट्रियां हो चुकी हैं बंद
जमशेदपुर के आदित्यपुर में बहुत ही फैक्ट्रिया हैं जिनमें से बहुत सी फैक्ट्रियों में ताला लगा हुआ है। यहां कि फैक्ट्रियों में टाटा मोटर से संबंधित उपकरणों का उत्पादन किया जाता था। जानकारी के मुताबिक टाटा मोटर्स में भी ब्लॉक यानी कि काम बंद होता दिखाई दे रहा है।
मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया यह सिर्फ जुमला है क्या?
सरकार के द्वारा बनाई गई योजना मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया मानो बस एक जुमला ही बनकर रह गया है जिन योजनाओं को नरेंद्र मोदी सरकार अपनी सबसे बड़ी जीत बता कर सत्ता में वापस लौटी है और इन्हीं योजनाओं के चलते देश मंदी के कगार पर पहुंच गया है। उनकी कई योजनाओं को विफल होते हुए साफ देखा जा सकता है चाहें वह नोटबंदी हो , जीएसटी हो या फिर कोई और।
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सियाम के महानिदेशक का बड़ा बयान
सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि ऑटोमोबिल सेक्टर में तीन लाख से ज्यादा अस्थायी कर्मचारियों कि नौकरी गई है। वाहन उत्पादन में 15000, डीलरों में 2.3 लाख और पुर्जों के उत्पादन में करीब 1 लाख अस्थायी नौकरियां गई हैं। करीब 10 लाख कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में भी हैं, हम सरकार से पैकेज की मांग करते हैं. हम चाहते हैं कि सरकार कुछ समय के लिए ऑटोमोबाइल सेक्टर पर जीएसटी रेट 28 से घटाकर 18 फीसदी करे।
