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क्या प्रभाव होगा लॉक डाउन का जीवन में?

इन दिनों कोरोना वायरस के चलते जहाँ पूरे भारत में लॉक डाउन चल रहा है तो इसका आम जीवन में क्या प्रभाव होगा यह कयास लगाए जा रहे हैं।

सारे कारोबार बंद हैं (जरूरी चीजों को छोड़कर ) लोगों की मूलभूत अव्यश्कताओं की पूर्ति कैसे होगी इसके लिए पूरी दुनिया मे लोग चिंतित हैं ।लगभग एक सप्ताह बीत रहा है सब कुछ बन्द हुए और अभी तक दुनिया भर में फैला Covid19 कम होने का नाम नहीं ले रहा है, हालांकि लोग अपनी तरफ से पूरी सतर्कता बरत रहें हैं। उनके मनमें यह विश्वास जरूर है कि इसका असर कम होगा। पूरी दुनियां इस समय विज्ञान कि ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। लोग सोच रहे हैं शायद कोई चमत्कार हो जाये।

खैर covid19 का संक्रमण तो खतरा तो है ही इसके अलावा पूरी दुनिया का आर्थिक चक्का जैसे रुक सा गया है जिससे आर्थिक क्षेत्र में बड़ा संकट दस्तक देने को तैयार खड़ा है।

इसका असर लोगों के आम जीवन पर पड़ना तय माना जा रहा है इस लिहाज से हम सभी को बैक टू बेसिक की तरफ लौटना होगा और मूलभूत जरूरतों जैसे रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य।

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एक चीज और मान के चलिए, इस बंदी के असर से रोजगार के कई सेक्टर प्रभावित होंगे, लिहाजा मिडिल क्लास लोगों को अपनी जीवन शैली में बदलाव करना ही होगा। यह इसलिये भी है क्योंकि आर्थिक सलाहकारों का मानना है कि एक ओर जहां भारत कि अर्थव्यवस्था पहले ही बेपटरी थी तो बन्दी के बाद क्या असर होगा और यह कबतक करनी पड़े अभी इसका भी कुछ कहा नही जा सकता है क्योंकि बंदी के इतने दिनों बाद भी अभी संक्रमण का खतरा कम होता नही दिख रहा है।

अस्सी के दशक में जब दुनिया में ग्लोबल मार्केट बनने लगी और दुनिया भर के देशों ने एक दूसरे के लिए अपने बाजारों के दरवाजे खोलना शुरू किए तो इसके प्रभाव अगले दशक में सबके सामने आने लगे। उस दौरान जो पीढ़ी पैदा हुई वह ज्यादा शाह-खर्ची वाली हुई मसलन बाहर खाना, नाईट क्लब, थियेटर, दुनियाभर की सैर आदि। इससे पहले की पीढ़ी अपने खर्चो को सीमित रखने वाली थी।

2008 की वैश्विक मंदी का भी भारत की अर्थव्यवस्था पर खासा असर हुआ था। उस समय इसका केंद्र अमेरिका था और भारत में उदारीकरण की नीति तथा उचित आर्थिक कदम उठाकर इसपर क़ाबू पाया गया था। इस बार एक बात तो तय है कि असर तो पड़ना है, हाँ ये जरूर है की डिजिटल इंडिया का दौर है लोग ऑनलाइन पेमेंट करने लगे हैं लेकिन फिर आदमी कुछ धन संचय करने का प्रयास जरूर कर रहा है।

लेकिन अपनी क्षमता के ऊपर जाकर खर्च करना उसके बजट को बिगाड़ने का प्रयास करेंगे। जिस देश में आज भी 30 फीसदी आबादी गरीबी रेखा(BPL) के नीचे हो उनके लिए दो वक्त का भोजन और जरूरी आवश्यक सामान हो वह संतुष्ट रहेंगे। इसके बाद आता है मध्यम वर्ग जिसकी 3 श्रेणी है अपर मिडिल,लोवर मिडिल,और मिडिल मिडिल क्लास, यह तकरीबन 60 फीसदी हैं।

मध्यम वर्गीय लोगों की एक खासियत है कि वह आमदनी में संतुलन बनाये रखने कि कला जानते हैं। इन दिनों मध्यम वर्ग काफ़ी कुछ सीख चुका है चूँकि बंदी कि वजह से बहुतों का दफ्तर जाना नही हो रहा है तो वो यही कहते हैं कि बीते एक हफ़्ते में सिर्फ़ दो जोड़ी कपड़े ही पहने हैं एक धुल के सूख जाता है तो अगले दिन वही पहन लेते हैं, हर दिन स्त्री करवाने झंझट नहीं है, थोड़ा बगैर क्रिच के भी रह सकते हैं, शाहखर्ची पर लगाम है। बच्चों को घर का खाना अच्छा लगने लगा है और खाने में रोज नए प्रयोग जारी हैं। कई सारे लोग इनदिनों अपनी कई आदतों में बदलाव की बात भी कह रहे हैं।

आपके जीवन पर इस लॉक डाउन का अब तक क्या प्रभाव हुआ है, हमें कमेंट करके बताएँ।

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आयुष तिवारी

वॉक्सी टॉक्सी के लेखक

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