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LIC में अपनी 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी प्रधानमंत्री मोदी की सरकार

मोदी सरकार का एक और महत्वपूर्ण फैसला-कोरोना के वजह से हुए आर्थिक संकट को दूर करने के लिए लिया ये फैसला।

देश की सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का आईपीओ भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है। भारतीय जीवन बीमा निगम की 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना के तहत सरकार रिटेल इन्वेस्टर्स को बोनस और डिस्काउंट देने पर विचार कर रही है।

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने एलआईसी में हिस्सेदारी बेचने का ड्राफ्ट तैयार किया है और इसे सेबी, इरडा और नीति आयोग समेत संबंधित मंत्रालयों के पास भेजा गया है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि सरकार कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को 100 पर्सेंट से घटाकर 75 फीसदी तक सीमित करना चाहती है।

मोदी सरकार को कोरोना काल में एलआईसी के आईपीओ से बड़ी रकम जुटने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस दौर में कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ने और टैक्स में कमी होने के अंतर की भरपाई एलआईसी की हिस्सेदारी को बेचने से पूरी हो जाएगी।

दरअसल मोदी सरकार को कोरोना काल में एलआईसी के आईपीओ से बड़ी रकम जुटने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस दौर में कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ने और टैक्स में कमी होने के अंतर की भरपाई एलआईसी की हिस्सेदारी को बेचने से पूरी हो जाएगी।

शायद यही वजह है कि सरकार ने एलआईसी की 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया है, जबकि पहले 10 फीसदी स्टेक ही बेचने की योजना थी।

हालांकि सरकार पहले चरण में 10 फीसदी हिस्सेदारी ही बेचेगी। उसके बाद अन्य हिस्सेदारी को कई राउंड में बेचने की योजना है। सूत्रों का कहना है कि एलआईसी की हिस्सेदारी बेचने में रिटेल इन्वेस्टर्स को प्राथमिकता दी जा सकती है और इसके लिए उन्हें 10 पर्सेंट का डिस्काउंट दिया जा सकता है। यह डिस्काउंट एलआईसी में काम करने वाले कर्मचारियों को भी मिलेगा।

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रिटेल इन्वेस्टर्स और कर्मचारियों के लिए 5 फीसदी शेयर रिजर्व किए जा सकते हैं। हालांकि शेयर्स को रिजर्व रखने का फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

इसके अलावा शुरुआती दिनों में बोनस शेयर की सुविधा भी दी जा सकती है। एलआईसी की हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार की ओर से एलआईसी ऐक्ट, 1956 में बदलाव भी किया जाएगा।

एलआईसी की स्थापना इसी ऐक्ट के तहत की गई थी। दरअसल एलआईसी कंपनीज ऐक्ट के तहत नहीं चलती है बल्कि यह एक स्वायत्त संस्था है और इसका संचालन एलआईसी ऐक्ट, 1956 के तहत किया जाता है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद एलआईसी ऐक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को सरकार संसद में पेश करेगी।

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आयुष तिवारी

वॉक्सी टॉक्सी के लेखक

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