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Social Media : इन तस्वीरों की तरह क्या आप भी तो सोशल मीडिया के जाल में नहीं फंसे रहे हैं ?

Modern World: आधुनिक दुनिया में हम सब तेज़ी से सोशल मीडिया से जुड़ते जा रहे है , लोग सिर्फ इससे जुड़ ही नहीं रहे बल्कि इसके आदि होते जा रहे हैं। कुछ ऐसी कल्पना को ही कुछ चित्रकारों ने चित्र में प्रदर्शित किया है।

दुनिया में सोशल मीडिया का क्रेज कुछ ज्यादा ही तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है इसमें हमारी बहुत सी परेशानियों को चुटकी में हल भी कर दिया है। आज हम अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की तस्वीरें देखने उनसे बात करने के लिए इसका सहारा लेते हैं।

पर कहीं ऐसा तो नहीं कि हम इस की जाल में पूरी तरह फंसते ही जा रहे हैं ? हम सोशल मीडिया पर कुछ देर के लिए जाते हैं पर घंटों उसी में अटके रह जाते हैं? अक्सर ऐसा ही होता है यह सब आपके साथ ही नहीं सबके साथ होता है, पर हमें इससे बाहर निकलने की कोशिश करनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर कुछ कार्टूनिस्ट ने अपने द्वारा संसार को देखे जा रहे हैं दृश्य को प्रदर्शित किया है, यह तस्वीरें हमने फेसबुक से ली हैं।

आइए देखते हैं ऐसे ही कुछ तस्वीरें –

आज की स्थिति को देखते हुए, यह दिन भी कुछ ज्यादा दूर नहीं है

चित्रकार की कल्पना में साफ प्रदर्शित हो रहा है कि आज दुनिया में बच्चों की स्थिति कैसी है

आधुनिक समय में प्यार पर भी भारी पढ़ता हुआ सोशल मीडिया दिखाई दे रहा है

शायद सोशल मीडिया ने हमें अपने आप से कुछ ऐसा ही जोड़ रखा है

सोशल मीडिया की मांग को देखते हुए 1 दिन सोशल मीडिया के डॉक्टर दुनिया में दिखाई जरूर देंगे

हमारे फोन में हमें सोशल मीडिया के कोनों से कुछ ऐसा ही बांध रखा है

यह किसी दरवाजे से कम नहीं है इधर घुसने के बाद आदमी काफी हद तक बदल जाता है

अपनों से ज्यादा सोशल मीडिया फोन को तवज्जो देने पर शायद हमारा हाल कुछ ऐसा ही होगा

चित्रकार की कल्पना में यह दिन करीब नजर आ रहा है जब हम पानी की कमी से जूझ रहे हैं

सोशल मीडिया हमारा समय हम से खींचता है अगर हम अपने आप को नहीं बदले तो यह में बर्बादी की ओर अवश्य मोड़ देगा

प्रकृति की चहचहाहट से ज्यादा हम आजकल सोशल मीडिया की चहचहाहट को तवज्जो देते हैं क्या यह सही है ?

हमने कुछ ऐसे ही दीवारें अपने रिश्तेदार परिवार के बीच खींच रखी है

आधुनिक दुनिया के प्यार की कुछ ऐसी सच्चाई नजर आ रही है

चल बेटा सेल्फी ले ले आज

जीवन का सुख ऑनलाइन में नहीं ऑफलाइन में है तस्वीर में साफ दिखाई दे रहे हैं

भले ही हम अपने पार्टनर के साथ हैं पर तवज्जो हम अपने फोन को ज्यादा देता है

कुछ ऐसा ही फर्क है आज के युवा और बुजुर्ग लोगों में

कहानी अनुसार कहीं हमें भी फेसबुक बांसुरी वाले हमें चूहों की तरह नदी में तो नहीं उलट रहा

यूं कुछ ऐसे खींचते चले जा रहे हैं हम आधुनिक के नाम पर फोन के अंदर

किसी पल को महसूस करना उसमें खुशी ढूंढ ना शायद आधुनिक दुनिया में जरूरी नहीं है जरूरी है उस पल को एक कैमरे में कैद करके रखना जिसे हम कभी दोबारा नहीं देखते

हमारे फोन के जड़ों ने कुछ ऐसे ही हमारे हाथों को पकड़ के रखा हुआ है

समय पर इसकी लत ना छुट्टी तो या दिन ज्यादा दूर नहीं है

कुछ ऐसा जरूर देखने को मिलेगा हमें समय कुछ समय के बाद

A

Abhishek Sekhar

वॉक्सी टॉक्सी के लेखक

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